क्या मेरे मन में समाई !!
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हसरत और शैलेन्द्र
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यदि आप से पूछा जाए कि ‘तीसरी कसम’ का गीत ‘दुनिया बनाने वाले क्या तेरे मन में समाई’ किसने लिखा है तो आप क्या बताएँगे ? शायद आप इसका जवाब देंगे – शैलेन्द्र । ‘तीसरी कसम’ और शैलेन्द्र का सम्बंध इतना प्रगाढ़ है कि इस फिल्म के गीत किसी और ने भी लिखे होंगे सोचा नहीं जाता । अपने शोध कार्य के दौरान जब मुझे यह पता चला कि यह गीत शैलेन्द्र ने नहीं लिखा है, तो मुझे बहुत दुख हुआ था । दुख इसलिए नहीं हुआ था कि मेरी जानकारी गलत थी, बल्कि इसलिए हुआ था कि एक गीत को गीतकार की रचनात्मक उपलब्धि के बतौर सुनने समझने की आदत रही है । शैलेन्द्र के गीतों के बारे में मैं जब भी सोचती थी तो इस गीत का भी ध्यान आता था । इस गीत को भी मैं शैलेन्द्र की रचनात्मक प्रतिभा का एक नमूना मानती थी । इस तरह गीतकार-गीत-श्रोता के बीच का जो एक त्रिकोण होता है उसमें से शैलेन्द्र की जगह हसरत जयपुरी के आने के बाद एक श्रोता की हैसियत से मुझे थोड़ी परेशानी तो हो ही गयी । अब जब कि ‘दुनिया बनाने वाले’ को हसरत जयपुरी के गीत के रूप में स्वीकार कर चुकी हूँ, इस गीत को सुनते हुए अब भी शैलेन्द्र का ध्यान हो आता है । यह अनुभव यदि आपको नहीं हो तो ही अच्छा है । हसरत जयपुरी के रचना संसार पर फिर कभी बात करेंगे । बहरहाल इस गीत को सुनिये और महसूस करिये कि हसरत संवेदनाओं की कितनी सूक्ष्म यात्रा पर आपको लिए चलने की क्षमता रखते हैं ।
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