Friday, 28 July 2017

इंदु सरकार देखकर लौटते हुए


'इंदु सरकार' देखकर लौटते हुए ऐसा नहीं लगा कि खाली हाथ लौट रही हूं। मेरे खयाल से इमरजेंसी के हालात को केन्द्र में रखकर बनाई गई किसी भी फिल्म को देखकर इमरजेंसी के बाद जन्मी या होश संभालने वाली पीढ़ी को शायद यही एहसास होगा। लेकिन इस फिल्म में भारी अधूरापन और राजनीतिक लोचा है। यह कहना दुखद है कि मधुर भंडारकर अब निष्ठावान फिल्मकार नहीं रहे। संभव हुआ तो इस पर बाद में विस्तार से लिखने की कोशिश करूंगी।

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